स्वामीआयुर्वेद स्वास्थसूत्रमाला - 48

दिनचर्या भाग 14 - शयनम


दिनचर्या भाग 14 शयनम (Sleep) शयनम अर्थात सोना (sleeping)। दिनचर्या मे सायंभोजनम के बाद सोने का समय होता है।अर्थात भोजन सेवन के 3 घण्टे बाद ही सोने का समय होता है, भोजन के बाद तुरंत नही। परंतु कुछ व्यवसायी लोग देर रात को घर आते है, खाना खाते है और तुरंत सो जाते है। ऐसा नही करना चाहिए। यही सातत्य अगर वर्षों तक रहा पाचन के विविध विकार शरीर मे घर बना लेते है। निद .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 47

दिनचर्या भाग 13 - सायंभोजनम


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 47 दिनचर्या भाग 13 - सायंभोजनम (Dinner) कुछ मुद्दे एकदम सामान्य होने की वजह से आयुर्वेद के आचार्यो ने दिनचर्या वर्णन करते वक्त उन मुद्दों का वर्णन नही किया। क्योंकि ये मुद्दे, जो आज हमारे लिए अहम है, वो उस काल मे अतिसामान्य थे। एक अनपढ व्यक्ति भी परंपरागत तरीके से उन मुद्दों के बारे मे जानकारी रखता था और इसलिए ही आ .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 46

दिनचर्या भाग 12 - ताम्बूलसेवनम


भोजन मे मधुरादि रसों से परिपूर्ण खाद्यपदार्थ होते है। इसलिए भोजनोत्तर मुख मे चिकनाहट उत्पन्न होती है। अगर मीठा या वसायुक्त (fatty) पदार्थ ज्यादा हो तो यह चिकनाहट जरा ज्यादा ही उत्पन्न होती है। इसलिए भारतीय आहारशास्त्र मे भोजनोत्तर मुखवास का उपयोग सूचित किया गया है। मुखवास के रूप मे आजकल तरह तरह के पदार्थ बाजार मे उपलब्ध है। जो स्वतः इतने मीठे ह .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 45

दिनचर्या भाग 11 - माध्यान्हभोजनम


दिनचर्या मे उल्लेखित जितनी प्रक्रियाये है, वो सभी प्रक्रियाए शरीर के ज्ञाननेंद्रिय तथा कर्मेन्द्रिय को स्वस्थ रखने के लिए बताये गये है। माध्यान्हभोजनम यह दिनचर्या के उपक्रमों मे उल्लेखित नही है, क्योकि यह इन उपक्रमों से परे है। माध्यान्हभोजन/ भोजन यह जीवन का आधार है। जीवन संतति (Continuity of life) बनाए रखने के लिए अत्यावश्यक है। इसलिए आचार्यों ने इसे .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 44

दिनचर्या भाग 10 - कर्णपूरणम


दिनचर्या भाग १० - कर्णपूरणम Filling the Ear परिचय - कर्णपूरण यह दिनचर्या का एक उपक्रम है। कर्णपूरण अर्थात तिल तैल अथवा अन्य किसी भी औषधसिद्ध तैल से कान भर देना। कर्णपूरण नित्य करना चाहिए ऐसा आयुर्वेद का आदेश है। इससे दैनिक जीवन में यह कितना महत्वपूर्ण है इस बात का पता चलता है। कर्णपूरण यह एक बहोत ही आसान दिनचर्या उपक्रम है, जिसे एक बार समझने के बाद घर प .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 43

दिनचर्या भाग 9 - अंजन तथा आश्च्योतन


दिनचर्या भाग - 9 अंजन तथा आश्च्योतन दिनचर्या उपक्रमों मे नेत्रसुरक्षा को ध्यान मे रखकर अंजन तथा आश्च्योतन जैसे उपक्रमों का भी समावेश किया गया है। वस्तुतः अंजन और आश्च्योतन इन दोनो उपक्रमों मे फर्क है, फिर भी दोनो नेत्रस्वास्थ्य बनाये रखने के लिए अतीव उपयोगी है। आयुर्वेदानुसार आँखो का स्वास्थ्य बना रहे इसलिए रोज 'सौवीर' नामक अंजन का प्रयो .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 42

दिनचर्या भाग 8 - नस्य


दिनचर्या भाग 8 - नस्य Nasal Drops नाक से औषधि द्रव्य प्रयुक्त करने को आयुर्वेदीय परिभाषा मे 'नस्य' करना कहते है। नस्य के मोटे तौर पर दो प्रकार होते है। 1. दैनिक नस्य 2. पंचकर्मान्तर्गत नस्य दैनिक नस्य रोज किया जाता है। दैनिक नस्य से आँख, नाक तथा कानों की प्राकृतिक कर्मशक्ति बनी रहती है। सिर के बाल तथा दाढी के बाल सफेद नही होते और न ही गिरते है, अपितु विशे .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 41

दिनचर्या भाग 7 - स्नान


दिनचर्या भाग 7 - स्नान (Bathing) दिनचर्या मे क्रमानुसार व्यायाम के बाद स्नान करना अपेक्षित होता है। परंतु व्यायाम के तुरंत बाद स्नान नही किया जाता यह ध्यान रहे। 45 मिनीट तक आराम करने के बाद ही स्नान करना चाहिए। इस 45 मिनीट मे समाचार पत्र पढना, सोशल मीडिया की सैर करना, पूरे दिन के कामों का प्लानिंग करना ऐसे काम बैठे बैठे किये जा सकते है। इन प्रवृत्तिओं के .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 40

दिनचर्या भाग 6 - व्यायाम


दिनचर्या अनुक्रम में अभ्यंग के बाद व्यायाम का क्रम आता है। शरीर निरोगी, सुदृढ और मजबूत बनाये रखने मे व्यायाम की अहम भूमिका होती है। नियमित व्यायाम करने से शरीर की कार्यक्षमता बढती है और काम करते वक्त थकान का अनुभव नही होता। इसलिए आयुर्वेद के ऋषि-मुनीयों ने व्यायाम को दिनचर्या मे स्थान दिया है। व्यायाम बिना अभ्यंग के नही करना चाहिए क्योंकि व् .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 39

दिनचर्या भाग 5 - अभ्यंग


अभ्यंग Oil Massage अभ्यंग यह दिनचर्या का पाँचवा सोपान है। गण्डूष के बाद अभ्यंग किया जाता है। अभ्यंग अर्थात सम्पूर्ण शरीर या शरीर के किसी एक भाग की तैल से मालिश करना। दिनचर्या का यही एक अंग ऐसा है, जिसे लोग अच्छी तरह से जानते है और समझते है। अभ्यंग को आजकल 'मसाज' के नाम से जानते है। जगह जगह मसाज पार्लर खुले है। परंतु आयुर्वेद शास्त्र को अभिप्रेत अभ्यं .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 38

दिनचर्या भाग 4 - गण्डूष


गण्डूष Oil Pulling गण्डूष यह दंतधावन के बाद किया जानेवाला दिनचर्या का चौथा उपक्रम है। गण्डूष यह संस्कृत शब्द है। गण्डूष अर्थात मुँह मे सिर्फ तैल, औषधसिद्ध तैल (Medicated oil), काढा (Decoction) या अन्य कोई भी उपयुक्त द्रव पदार्थ (जैसे गोमूत्र या शिवाम्बु) एक विशीष्ट समय के लिए धारण करना। गण्डूष इस दिनचर्या उपक्रम को तो छोड़ो, गण्डूष शब्द को भी आजकल कोई नही जानता इतना .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 37

दिनचर्या भाग 3 - दन्तधावनम


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 37 दिनचर्या - भाग 3 दन्तधावनम - Brushing The Teeth दंतधावन मतलब दाँत साफ करना, दाँत घिसना। दंतधावन यह आयुर्वेदीय ग्रंथोंद्वारा वर्णित दिनचर्या का तीसरा सोपान है। शौचविधी पूर्ण होने के बाद दंतधावन किया जाता है। प्राचीन काल मे दाँत साफ करने के लिए शास्त्र की सलाहनुसार दातौन या मंजन का उपयोग किया जाता था। वैसे आज के आध .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 36

दिनचर्या भाग 2 - शौचविधी


दिनचर्या - भाग 2 शौचविधी शौचविधी एक अत्यंत सामान्य प्रक्रिया है। इसीलिए शौचविधी का आयुर्वेदीय संहिताओं मे वर्णन नही मिलता। परंतु हमारे ऋषिमुनियों को क्या पता की आनेवाली पीढी को शौचक्रिया भी समझानी पडेगी। सुबह उठने के बाद तुरंत शौचवेग आये ऐसी प्रत्येक भारतीय की इच्छा होती है। परंतु बहोत ही कम लोगों को ऐसा सौभाग्य प्राप्त होता है। अन्य लो .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 35

दिनचर्या भाग 1 - ब्राम्ह मुहूर्त उत्तिष्ठेत


दिनचर्या भाग - 1 ब्राम्ह मुहूर्त उत्तिष्ठेत Getting up early in the Morning ब्राम्ह मुहूर्त उत्तिष्ठेत अर्थात सुबह नींद से जल्दी उठना। ब्राम्ह मुहूर्त रात्री का अंतिम प्रहर होता है, जो सूर्योदय से डेढ घण्टा पहले शुरू होता है। ब्राम्ह मुहूर्त मे उठना अर्थात प्रातोत्थान यह दिनचर्या का पहला सोपान है। सुबह उठने के लिए हमारे ऋषि-मुनियो ने ब्राम्ह मुहूर्त का वि .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 34

स्वास्थ्यरक्षण के आयुर्वेदीक उपाय


स्वास्थ्यरक्षण के आयुर्वेदीक उपाय Ayurvedic Ways of Preserving Health मनुष्य के व्याधी की चिकित्सा करने के लिए संसार मे आज कई चिकित्सापद्धतीयाँ उपलब्ध है। जिसमे एलोपैथी, आयुर्वेद, होमिओपैथी, नेचुरोपैथी ऐसी चिकित्सापद्धतीयाँ मुख्य है, जिनका प्रचलन आज ज्यादा है। ये सभी चिकित्सापद्धतीयाँ मनुष्य शरीर मे उत्पन्न व्याधी की चिकित्सा तो करते है, परंतु स्वास्थ्यर .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 33

अब क्या?


अब क्या? What Now? हॉस्पिटल के बाह्यरुग्ण विभाग (OPD) आजकल कई वृद्ध लोग पार्किन्सन(Parkinsons Disease) जैसे व्याधी की चिकित्सा करवाने हेतु आते है और पूँछते है की यह समस्या मुझे पिछले 3-4 सालों से है। अब क्या कर सकते है? क्या आप के आयुर्वेद मे इसका इलाज है? हम बडी आशा लेकर आयुर्वेद के पास आए है। एलोपैथी की औषधियाँ अभी चालू ही है पर कोई उत्तम परिणाम नही मिले। औषधियाँ ले .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 32

बालों की समस्याओं का चिकित्सा अवधि कितना होना चाहिये?


बालों की समस्याओं का चिकित्सा अवधि कितना होना चाहिये? What Should Be the Duration of Hair Treatment? सम्प्रति दिन-प्रतिदिन बालों की समस्याओं में बढ़ोतरी हो रही है। उम्र के हर पड़ाव वाले बच्चे और बड़ों में बालों से संबंधित समस्याओं का अंबार बढ़ता ही जा रहा है। किसी के बाल सफेद हो रहे है तो किसी के झड़ रहे है। किसी के बालों की कोमलता कम हो गई है तो किसी के बालों में रूसी बढ़ रही है .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 31

वातविकार - कालत्व और अकालत्व


वातविकार - कालत्व और अकालत्व Rheumatological Disorders - Proper Timing & Its Prematurity वातविकार अर्थात बढ़े हुए वातदोष की वजह से मनुष्य शरीर मे निर्माण होनेवाली व्याधियाँ। संधिवात (Arthritis), गृध्रसी (Sciatica), पृष्ठवंश के विकार (Spinal Cord Disorders), मन्यास्तंभ (Cervical Spondylitis) पृष्ठग्रह (Thoracic Spine Arthritis), त्रिकग्रह (Lumber spondylitis) ये सभी व्याधियाँ वातविकारों के अंतर्गत आते है। वातविकार प्राचीन काल मे भी अस्तित्व में .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला – 30

अमचूर और तैयार सब्जी के मसालें


अमचूर और तैयार सब्जी के मसालें Dried Mango Powder & Readymade Sabji Masala आयुर्वेद चिकित्सा में पथ्यापथ्यपालन अर्थात परहेज करना अति महत्वपूर्ण है। बिना परहेज की चिकित्सा ही व्यर्थ है। आचार्य सुश्रुत के अनुसार परहेज करना ही आधी चिकित्सा है। कई बार बिना औषधियों के और सिर्फ पथ्यापथ्यपालन से ही रोगों को ठीक कर सकते है। परन्तु अनेक बार ऐसा भी देखा गया है की रोगी दृढ़ता .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 29

इसबगोल - आवश्यक / अनावश्यक?


इसबगोल - आवश्यक / अनावश्यक? Isabgol - Beneficial or Harmful कब्ज यह एक बहोत ही छोटासा व्याधी है। परंतु छोटा होने के बावजूद भी विश्वव्यापी है। वस्तुतः कब्ज एक अवस्था है, न कि कोई स्वतंत्र व्याधी। गलत आहारविहार के कारण यह अवस्था उत्पन्न होती है। परंतु यही अवस्था अगर दीर्घकाल तक बनी रहे, तब ही व्याधि स्वरुप मे परिवर्तित हो जाती है। फिर लोग इसके निवारण के लिए तरह तरह .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 28

काला मुनक्का - भाग 4


मृद्विका बृंहणी वृष्या मधुरा स्निग्धशीतला। मृद्विका अर्थात मुनक्का। बाजार मे आजकल दो प्रकार के मुनक्का उपलब्ध है। पीले और काले। दोनो के गुणधर्म एक समान ही होते है। फिर भी काला मुनक्का पीले मुनक्के से श्रेष्ठ माना जाता है। क्यों कि काले मुनक्के मे सभी प्राकृतिक गुणधर्मों का प्रकर्ष देखने को मिलता है। यही काला मुनक्का अगर सेन्द्रिय (organic) हो .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 27

स्वयंचिकित्सा - आत्मघाती कदम


स्वयंचिकित्सा - आत्मघाती कदम Dangers of Self Medication स्वयंचिकित्सा अर्थात डॉक्टर की सलाह लिए बिना ही किसी व्याधि के लिए खुद ही औषधि चुनना और उसका उपयोग करना। मनुष्य मे यह आदत एक सहज प्रवृत्ति के रूप मे देखी जा सकती है। परंतु विकसनशील देशो के नागरिकों मे यह प्रवृत्ति ज्यादा पाई जाती है। सम्प्रति इस प्रवृत्ति के दो मुख्य कारण पाये जाते है। 1) गरीबी 2) डॉक्टर .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 26

क्या आयुर्वेदिक औषधियों की एक्सपायरी होती है?


क्या आयुर्वेदिक औषधियों की समाप्ती तिथी होती है? Do Ayurvedic Medicine Expire? एक सामान्य व्यक्ती के मन मे बारबार यह प्रश्न उत्पन्न होता है की क्या एलोपैथी औषधियों के जैसी आयुर्वेदीक औषधियों को भी समाप्ती तिथी (Expiry Date) होती है? इस प्रश्न का उत्तर - हाँ भी है और ना भी .... एक्सपायरी को आयुर्वेद मे 'सवीर्यताविधि' ऐसा कहा जाता है। स - सह, वीर्यता - कार्य करने की ' शक्ति, अव .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 25

डायबिटीज और बीपी मे चिकित्सापद्धति का चुनाव


डायबिटीज और बीपी मे चिकित्सापद्धति का चुनाव Selection of Therapy in Diabetes & Blood Pressure स्वातंत्र्योत्तर काल मे बदली हुई जीवनशैली ने कुछ नये व्याधियों को भी जन्म दिया। मधुमेह (Diabetics) और उच्च रक्तचाप (Hypertension or Blood pressure) ये दोनो व्याधी इसी बदली हुई जीवनशैली का प्रसाद है। मधुमेह से पीडित लोगों की संख्या मे भारत का स्थान तिसरा है और उच्च रक्तचाप के कुल 18% नये रुग्णों का प्रतिवर .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 24

आयुर्वेद एवं एलोपैथी - तुलनात्मक चर्चा


आयुर्वेद एवं एलोपैथी - तुलनात्मक चर्चा Ayurved & Allopathy - A Comparative Discussion एलोपैथी यह स्वतंत्र भारत की प्रथम राजमान्य चिकित्सापद्धती है। अनेक कारणों से समाज का इस चिकित्सापद्धति पर विश्वास भी है। इसीलिए शरीर मे उत्पन्न होनेवाली प्रत्येक समस्या के समाधान का प्रथम प्रयास लोग एलोपैथी से ही करते है। परंतु एलोपैथी भी जब उनकी स्वास्थ समस्या का समाधान नही कर सक .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 23

क्या बाल धोने के लिए बालों में झाग होना जरुरी है?


क्या बाल धोने के लिए बालों में झाग होना जरुरी है? Is Foaming Necessary to Wash Hairs? आजकल केशप्रक्षालन के लिये शैम्पू का उपयोग किया जाता है। शैम्पू का उपयोग इतना सामान्य हुआ है की शैम्पू के बगैर बाल धोने के बारे में सोचा ही नही जा सकता। जब तक बालों में धोते वक्त झाग तैयार नही होता, तब तक बाल धोये है ऐसा लगता ही नही। पर क्या आपको पता है की ऐसा करके आप अपने बालों की समस .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 22

अचानक ?


कुछ दिन पहले की बात है। एक पेशंट अपने भाई एवं भाभी के साथ ओपीडी मे आया। उम्र थी 52 वर्ष, परंतु लग रहा था 72+.. शरीर पूरा सुखा हुआ। शरीर मे थोडी भी ताकत बची नही। चलते वक्त लडखडाता था। पूँछने पर उसके भाईने उसका पूरा इतिहास बताया की 'सर, इसका ये हाल 'अचानक' से हुआ। 10 दिन पहले तक तो ठीक था। फिर अचानक से झटका आया और चलना बंद हो गया। बोलना बंद हो गया।' अधिकतर लोग ऐ .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थसूत्रमाला - 21

सफ़ेद दागो की चिकित्सा का एक अनछुआ पहलू


सफेद दाग मतलब कोढ। संस्कृत मे इसे श्वित्र, मराठी-गुजराती मे कोड और इंग्लिश मे Leucoderma, Vitiligo के नाम से जाना जाता है। यह व्याधी इतना सामान्य है की ज्यादातर समय इसका निदान करने के लिए डॉक्टर की जरुरत नही पडती, इसके लक्षणों से ही स्वतः इसका निदान हो जाता है। आजकल हम देखते है की यौन-समस्याओं के समाधान के जितने विज्ञापन होते है, उतने ही विज्ञापन सफेद दागों ( .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थसूत्रमाला - 20

क्या पेट साफ करने के लिए रात को सोते समय चूर्ण लेना चाहिए?


लेख का शीर्षक पढने के बाद तो आप भौचक्के रह जाओगे की अब इसमे क्या समस्या है? ऐसा तो हम कई वर्षों से सेवन कर रहे है। पर समस्या यही है, क्यूँ की आप गलत परंपरा को सही मानकर चल रहे हो, जो आपके स्वास्थ को लाभ की जगह हानी पहुंचा रहा है। हो सकता है की आपके पिताजी, दादाजी या नानाजी भी पेट साफ करने की औषधी रात को सोते समय ही लेते रहे हो, परंतु इसका मतलब यह नही की वे .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थसूत्रमाला - 19

काला मुनक्का - 3


स्वामीआयुर्वेद काला मुनक्का एक उत्कृष्ट कोटि का मुनक्का है। एक आहारीय द्रव्य होने के बावजूद काला मुनक्का एक उत्कृष्ट औषधि भी है, जिसका विवरण हम पूर्ववर्ती भागों में दे चुके है। आज कुछ अन्य औषधीय गुणधर्मो का विवरण आपकी सेवा में प्रस्तुत है। तिक्तास्यतामास्यशोषं कासं चाशुव्यपोहति। 1. तिक्तास्यता - तिक्तास्यता अर्थात मुँह का कडवापन। शरी .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 18

आयुर्वेदीय आहारविधी - 10


आयुर्वेदीय आहरविधी का दसवाँ एवं अंतिम नियम है - आत्मानभिसमीक्ष्य भुञ्जित सम्यक। अर्थात अपनी शारीरिक शक्ती को देखकर ही भली-भांती भोजन करे। अब सामान्य मनुष्य अपनी शारीरिक शक्ति का अन्वेषण किस प्रकार करे? इसका उत्तर सरल है - Trial & error method, अर्थात परीक्षण द्वारा भूल-सुधार पद्धती। इस पद्धती मे स्वयं के लिए क्या उचित? क्या अनुचित है? इसका निर्णय उस वस् .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थसूत्रमाला - 17

आयुर्वेदीय आहारविधी - 9


आयुर्वेदीय आहारविधी का नौवाँ नियम है - अजल्पन्नहसन् तन्मना भुज्जीत। इस नियम मे 3 महत्वपूर्ण बाते समाहित है - १) आहार सेवन करते समय बातचीत नही करना चाहिए। २) हँसते हुए भोजन ग्रहण नही करना चाहिए। ३) मन लगाकर एकाग्रता से भोजन करना चाहिए। परंतु ये नियम पढकर आपको तो शायद हँसी भी आएगी। क्यों कि प्रचलित समय मे तो यह असंभव सा लगता है। आजकल खाना खाते सम .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 16

आयुर्वेदीय आहारविधी - 8


आयुर्वेदीय आहारविधी का आठवाँ नियम है - नातिविलम्बितमश्नीयात् अर्थात अधिक देर लगाकर भोजन न करे। साधारणतः एक व्यक्ती को भोजन करने के लिए औसतन 20 मिनीट लगते है। इससे ज्यादा समय नही लगना चाहिए ऐसा शास्त्र का मंतव्य है। परंतु भागदौड के इस युग मे जहाँ लोगो को साँस तक लेने की फुरसत नही, वहाँ अधिक देर लगाकर भोजन कौन करेगा? उत्तर है - बच्चे और महिलाए बच .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 15

आयुर्वेदीय आहारविधी-7


आयुर्वेदीय आहारविधी का सातवाँ नियम है - नातिद्रुतमश्नीयात्। अर्थात तेजी से आहार सेवन नही करना चाहिए। क्यूँ? क्या होता है तेजी से आहार सेवन किया तो? व्यवहार मे हम देखते है स्वामी विवेकानंद हो, परमहंस योगानंद हो या अन्य कोई महापुरुष - सभी ने किसी भी कार्य की सफलता के एकाग्रता को ही जरूरी बताया है और एकाग्रता भी तभी साधती है, जब मन/शरीर किसी अन्य .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 14

आयुर्वेदीय आहारविधी - 6


आहार और मानसिक भाव Diet & psychological factors आयुर्वेदीय आहारविधी का छठवाँ नियम है - इष्टे देशे इष्टसर्वोपकरणं अश्नीयात इष्टे देशे - अर्थात आहार सेवन करने का जो स्थान है वह इष्ट होना चाहिए। इष्ट मतलब मनोनुकूल, मन प्रसन्न करनेवाला। आहार का स्थान मन प्रसन्न तभी करेगा जब वह स्वच्छ होगा। इसीलिए इष्टे देशे का अर्थ स्वच्छ स्थान लेना चाहिए। मनुष्य का मन बडा ही स .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 13

आयुर्वेदीय आहारविधी - 5


आयुर्वेदीय आहारविधी का पाँचवा नियम है - वीर्याविरुद्धमश्नीयात। अर्थात अविरूद्ध वीर्यवाले आहारद्रव्य/खाद्यपदार्थ एकसाथ ही खाने चाहिए। मतलब जिन दो खाद्यपदार्थों का वीर्य समान हो उन्हें ही साथ-साथ/ एकसाथ खा सकते है। परंतु अब वीर्य मतलब क्या? आयुर्वेदीय परिभाषा में वीर्य का मतलब Potency होता है। अर्थात किसी भी द्रव्य (Matter) की कार्य करने की शक्ति .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 12

आयुर्वेदीय आहारविधी - 4


जीर्णे अश्नीयात - आयुर्वेदीय आहारविधी का चौथा नियम है - जीर्णे अश्नीयात। अर्थात पहले सेवन किये हुए आहार का जब पूर्णरूप से पाचन हो जाये तभी पुनः भोजन करना चाहिए। मतलब भूख लगने पर ही भोजन करना चाहिए। आहारकाल यह भोजनविधी का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है। शरीर को स्वस्थ बनाए रखनेवाले अनेक कारणों मे से भोजनकाल एक है। नियत समय पर भोजन करने से अन्नपचन .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 11

आयुर्वेदीय आहारविधी - 3


आयुर्वेदीय आहारविधी का तिसरा नियम है - मात्राशी स्यात्। अर्थात आहार सदैव उचित मात्रा में ही लेना चाहिए। अब यह 'उचित मात्रा' (Optimum quantity) मतलब कितनी मात्रा? तो आयुर्वेद इसकी व्याख्या करता है 'अग्निबलापेक्षिणी' अर्थात प्रत्येक व्यक्ति की उचित मात्रा यह उस व्यक्ति के पाचकाग्नि के बल (ताकत) पर निर्भर करती है। इसीलिए सबके लिए एक ही मात्रा का निर्धारण नह .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थसूत्रमाला - 10

आयुर्वेदीय आहारविधी भाग - 2


आयुर्वेदीय आहारविधी का दूसरा नियम है स्निग्धं अश्नीयात् अर्थात भोजन मे सदैव स्निग्ध पदार्थ होना चाहिये। स्निग्ध अर्थात घी और तैल से बने पदार्थ, न कि घी या तैल मे तले हुये। कोई भी यंत्र सुचारू रूप से चलने के लिए जैसे स्नेह (oil or grease) की अत्यंत जरुरत होती है, वैसे ही मनुष्य शरीर का क्रियाकलाप (Biological activities) सम्यक रूप से चले इसीलिए मनुष्य को भी स्नेह की अत् .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 9

आयुर्वेदीय आहारविधी भाग-1


उष्णं अश्नीयात् - आहारविधी एवं आहारनियमों के बारे मे आयुर्वेद मे जितना सूक्ष्मातिसूक्ष्म विचार किया गया है, शायद ही उतना किसी अन्य शास्त्र मे किया गया हो। आहारविधी के बारे मे आयुर्वेद मे अष्टौआहारविधी विशेषायतान के अंतर्गत विस्तार से चर्चा की गई है, जिनकी एक एक करके हम यहा चर्चा करेंगे। 1) उष्णं अश्नीयात् - अर्थात भोजन गरमागरम और ताजा ही सेव .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 8

आयुर्वेदोक्त आहार संकल्पना


आहार जीवन का एक अभिन्न अंग है। जीवन परंपरा कायम बनाये रखने के लिए भोजन अति आवश्यक है।अगर आदमी को भूख ही नही लगती तो शायद संसार मे क्रिया कलाप ही न होता। इस भूख को संतुष्ट करने के लिए आहार परम आवश्यक है। पर यही आहार अगर विधिवत नही लिया जाता, तो असंख्य व्याधी निर्माण करता है, और विधिवत लिया जाता है तो शरीर का संवरण करता है। आयुर्वेद मे आहार के बारे म .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 7

क्यूँ सबका कोलेस्टेरॉल बढता है आजकल?


हॉस्पीटल के बाह्यरुग्ण विभाग (OPD) मे आनेवाले 10 रुग्णों मे से कम से कम एक रुग्ण का कोलेस्टेरॉल, ट्रायग्लिसराईड्स, एल. डी. एल. अर्थात लिपीड प्रोफाइल (Lipid profile) बढ़ा हुआ रहता है और मजे की बात तो यह है की यह बताते वक्त रुग्ण मे जरा भी दुःख / चिंता का भाव नही रहता। उल्टे उसके चेहरे पे खुशी का भाव रहता है। क्यूँ की कोलेस्टेरॉल/लिपिड प्रोफाइल बढना ये आजकल वैभव-प्र .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 6

क्या आयुर्वेदिक औषधियोंके दुष्परिणाम होते है?


एलोपैथी (आधुनिक चिकित्सा विज्ञान) पिछले कुछ शतकों से ही अस्तित्व में है। इसमें से पिछले 100 सालों में ही बहोत सी नई नई एलोपैथिक औषधियाँ बाजार में आयी और जितनी आयी उससे आधी तो विविध देशो की सरकारो द्वारा प्रतिबंधित की गई। इस प्रतिबन्ध का मुख्य कारण था - उन उन नये औषधों के मानवी शरीर पर होनेवाले दुष्परिणाम। कभी कभी किसी व्याधी की चिकित्सा में तो ऐस .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 5

काला मुनक्का - भाग 2


स्वामीआयुर्वेद काला मुनक्का सेन्द्रिय पद्धती (organic method) से विकसित (cultivate) किया जाता है, जिससे उसमे प्राकृतिक गुणोपलब्धि अपनी चरमसीमा पर रहती है। यह काला मुनक्का विविध व्याधियों में उपयोग किया जाता है। ऐसी ही कुछ व्याधी तथा अवस्थाओं का वर्णन आपकी सेवा में प्रस्तुत है। 1) काला मुनक्का यह मधुर, गुरु, स्निग्ध् और बृहण होने के कारण सभी वात-पित्त के विकार .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 4

अंकुरित धान्य -सेवनयोग्य या अयोग्य?


हरे मूँग, चना, मटकी, गेहू जैसे धान्यों को पानी मे भिगोकर या गीले कपडे में बाँधकर अंकुरित होने के बाद उसके तरह तरह के व्यंजन (recipes) बनाकर बनाकर आज खाये जाते है। कोई नाश्ते में कच्चे खाता है तो कोई सब्जी बनाकर मुख्य आहार मे लेता है। ढाबे से लेकर पाँच सितारा होटल तक, गरीब की झोपड़ी से लेकर अमीरों के महलो तक अंकुरित धान्यों से बने व्यंजन बडे ही चाव के साथ ब .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 3

उषःपान


आजकल पानी पीना ये जरुरत कम और फैशन ज्यादा हो गया है। अर्थात लोग शरीर के लिये जितना आवश्यक है, उससे ज्यादा पानी पीते है। क्यू? क्यू की सुना है, ज्यादा पानी पीने से.... 1) त्वचा हिरोईन जैसी कोमल रहती है। 2) पथरी नही होती। 3) पेट साफ होता है। 4) आलस्य जाकर शरीर में स्फूर्ती आती है। पर वास्तविकता यह है की उपरोक्त सभी फायदे सिर्फ संतुलित मात्रा में ही पानी प .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 2

काला मुनक्का - भाग 1


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 2 काला मुनक्का - भाग 1 मुनक्का अर्थात सूखे द्राक्ष। मुनक्का किसी विशेष परिचय की अपेक्षा नही रखता क्यू की मुनक्के से प्रत्येक व्यक्ति (छोटों से लेकर बड़ों तक) भलीभाँति परिचित है। मुनक्के से ड्राई फ्रूट के रूप हमारा प्रथम परिचय बचपन में ही होता है परंतु औषधीय गुणों का परिचय तब होता जब बुखार में माँ हमें मुनक्क .....


स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 1

चाय+रोटी खाने के परिणाम


आजकल ज्यादातर लोगों में भूख न लगना, पाचन मंद होना, ज्यादा गैसेस होना, जोर जोर से (कर्कश ) डकार आना ऐसे लक्षणस्वरुप व्याधी मिलते है। इसके कारण तो वैसे कई सारे गिनाये जा सकते है। पर सबसे सामान्य कारण है - सुबह का नाश्ता। सुबह के नाश्ते में न्यूनाधिक सभी लोग अर्थात अमीर हो या गरीब, दोनों चाय के साथ रोटी खाते है। सुलभ उपलब्धता के कारण यही नाश्ता सभी लोग .....