स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 26

क्या आयुर्वेदिक औषधियों की एक्सपायरी होती है?

क्या आयुर्वेदिक औषधियों की समाप्ती तिथी होती है?

Do Ayurvedic Medicine Expire?

एक सामान्य व्यक्ती के मन मे बारबार यह प्रश्न उत्पन्न होता है की क्या एलोपैथी औषधियों के जैसी आयुर्वेदीक औषधियों को भी समाप्ती तिथी (Expiry Date) होती है?

इस प्रश्न का उत्तर - हाँ भी है और ना भी ....

एक्सपायरी को आयुर्वेद मे 'सवीर्यताविधि' ऐसा कहा जाता है। स - सह, वीर्यता - कार्य करने की ' शक्ति, अवधि - समय, काल अर्थात ऐसा काल (duration) जिसमे द्रव्य की कार्य करने की शक्ति पूर्णतः उसके साथ रहती है। इस समय के दरम्यान वह औषधी द्रव्य (Medicine) अपने पुरे शक्ति के साथ कार्य करने की क्षमता रखता है। यह कार्यकारी शक्ति उस औषधीद्रव्य मे परिपक्व (mature) होने के बाद ही आती है। मतलब परिपक्व होने के बाद सभी आयुर्वेदिक औषधियाँ एक निश्चित समय तक अपने पुरे शक्ती के साथ रुग्ण शरीर मे कार्य करती है। इस काल के बाद वही औषधद्रव्य अपनी कार्य करने की शक्ति अल्पत: खो देता है। परंतु पूर्ण निर्वीर्य भी नही होता न ही उसमे कुछ नये घातक गुणों की उत्पत्ति होती है। जो औषधिद्रव्य पहले 100% कार्य करता होगा। वही द्रव्य सक्रिय काल (Active period) के पश्चात 90% कार्य करेगा या इससे थोडा कम ज्यादा परंतु करता जरूर है।
जैसे प्रत्येक व्यक्ति जब तारुण्यावस्था मे होती है, तब वह कोई भी काम करने मे सक्षम होती है। परंतु जैसे ही वह व्यक्ति 60 साल पूर्ण कर देती है, भारत सरकार उस व्यक्ति को सेवानिवृत्त कर देती है। क्योंकि उस उम्र मे उस व्यक्ति की कार्यक्षमता, निर्णयक्षमता घट जाती है। परंतु पूर्ण नष्ट नही होती। व्यवहार मे हम देखते है की कई सारे लोग सेवानिवृत्ती के बाद भी उम्र के 75 वर्ष तक अव्याहत काम करते है। काम भले ही पहले जैसा नही करते हो, परंतु करते जरूर है। केवल जो उत्साह या नियत समय मे कार्य पूर्ण करने की शक्ति होती है वो धीरे धीरे कम होना शुरू हो जाती है। यही सिद्धान्त औषधिद्रव्यों के बारे मे कार्य करता है। आयुर्वेदिक औषधियों की पूर्णशक्ति से कार्य करने की क्षमता का एक निश्चित अवधि शास्त्र ने भले ही तय कर दिया हो लेकिन उस निश्चित समय के बाद वह औषधीद्रव्य कार्यक्षमता हीन नहीं हो जाता।

कुछ आयुर्वेदिक औषधी कल्पनाए जैसे रसकल्प (Mineral Preparations), भस्म, आसव-अरिष्ट, पोट्टली कल्प, पर्पटी कल्प इनकी तो कोई समाप्ति तिथि नही होती। इसके विपरीत यह औषधियाँ जितनी पुरानी होती है, उतनी ही ज्यादा कार्यक्षम एवं फलदायक होती है।
सवीर्यताविधि की विवेचना करते हुए आयुर्वेदीय ग्रन्थों मे प्रत्येक कल्पना (Preparation, formulation) का सक्रिय काल दिया है, जिसका वर्णन निम्नानुसार है -
गुटि / वटी - १ वर्ष
चूर्ण - २ वर्ष
अवलेह - १ वर्ष
तैल - १ वर्ष
घृत - ४ मास
आसव, अरिष्ट - जितने पुराने उतने अधिक गुणकारी
अयस्कृति कल्पना - जितने पुरानी उतनी अधिक गुणकारी
भस्म - जितना पुराना उतना अधिक गुणकारी
पोटली कल्प - जितने पुराने उतने अधिक गुणकारी
पर्पटी कल्प - जितने पुराने उतने अधिक गुणकारी
मलहम - २ मास
लवण कल्पना - २ मास
मंजन - २ मास तक
क्षार कल्प - १ से ५ वर्ष तक

उपरोक्त कार्यकाल का अर्थ है की यह औषधी कल्पनाए (Medical formulations) इस समय के दरम्यान अपनी पूर्णशक्ति से कार्य करेगी। यह विवरण 13 वी शती का है। जिस समय आज के जैसी पैकिंग की सुविधाए उपलब्ध नही थी। पर आजकल पैकिंग की नयी एवं अद्यतन तकनीक के चलते वटी-गुटी (Tablets), चूर्ण (powder) जैसी कल्पनाओं को इससे दोगुने समय तक आराम से सक्रिय रखा जा सकता है। लेकिन हवाबंद पैकिंग हटाने के बाद उन्हे समाप्ती तिथी के उपरोक्त नियम लागू होंगे। मतलब हवा, पानी, सूर्यप्रकाश के संपर्क से उनके गुणों मे न्यूनता आना शुरू हो जाता है। हालाँकि इसके बाद अगर कोई औषधि सेवन की भी गई, तो भी कोई नुकसान (Adverse reaction) नही होता, बशर्ते की औषधि का संग्रहण (storage) स्वच्छ और सुरक्षित जगह किया गया हो। अस्तु। शुभम भवतु।

© श्री स्वामी समर्थ आयुर्वेद सेवा प्रतिष्ठान, खामगाव 444303, महाराष्ट्र, भारत

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