स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 32

बालों की समस्याओं का चिकित्सा अवधि कितना होना चाहिये?

बालों की समस्याओं का चिकित्सा अवधि कितना होना चाहिये?

What Should Be the Duration of Hair Treatment?

सम्प्रति दिन-प्रतिदिन बालों की समस्याओं में बढ़ोतरी हो रही है। उम्र के हर पड़ाव वाले बच्चे और बड़ों में बालों से संबंधित समस्याओं का अंबार बढ़ता ही जा रहा है। किसी के बाल सफेद हो रहे है तो किसी के झड़ रहे है। किसी के बालों की कोमलता कम हो गई है तो किसी के बालों में रूसी बढ़ रही है। हालाँकि प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर इन समस्याओं के निराकरण के लिए प्रयत्नशील तो है ही, फिर भी उसे पर्याप्त रूप से यशप्राप्ति नही हो रही है। इसका मुख्य कारण है - योग्य साधन का अभाव। आज जिस साधन (Therapy) को साध्य (Hair Treatment) पाने के लिए उपयोग में लाया जा रहा है वस्तुतः वह केशपोषक न होकर केवल केशवृद्धि के लिए बाधक है। आइये प्रथमतः केश समस्याओं के बारे में विस्तृत चर्चा करते है।

बालों की समस्यायें मुख्यतः 2 प्रकार की होती है।

1. जो अन्य व्याधियों के कारणस्वरूप होती है।
जैसे हाइपोथायरायडिजम , टायफॉइड, रक्ताल्पता (पाण्डु, anemia ), या फंगल इंफेक्शन की वजह से बाल झड़ना
2. जो अनुचित खानपान एवं रहन सहन के परिणामस्वरूप होती है।

अन्य व्याधि के कारणस्वरूप उत्पन्न होनेवाली बालों की समस्याएं उस व्याधि की उचित चिकित्सा करने से ठीक हो जाती है। परंतु आजकल जो बालों की समस्याये हमें मिलती है, मूलतः ये अनुचित आहारविहार की वजह से उत्पन्न होती दिखाई देती है। अन्य शब्दों में कहे तो ये एक जीवनशैली विकार (Lifestyle disorder) है। प्रत्येक व्यक्ति स्वस्थ रहे इसीलिये आयुर्वेद में एक आदर्श जीवनशैली बताई है जिसे दिनचर्या तथा ऋतुचर्या के नाम से जाना जाता है। पर आजकल की भागदौड़ की जिंदगी में दिनचर्या एवं ऋतुचर्या का पालन करने के लिये किसी के भी पास समय नही है। न कोई समय पे खाता है, न हि सोता है। समय पे खानेवाले संयम से आहार का सेवन नही करते। जीभ को जो अच्छा लगे वही खाते है, जिसमे ज्यादातर जंक फ़ूड का ही समावेश होता है। जंक फूड में स्वाद लाने के लिए धड़ल्ले से रसायनों का उपयोग किया जाता है। आहार में खट्टा और तले हुए पदार्थों की भरमार होती है, जो शरीर धातुओं को और दूषित तथा दुर्बल बना देते है। रात्रीजागरण तो शहरों में एक आम बात हो गयी है। यह क्या कम था तो शहरी प्रदूषण ने इस समस्या को और भी विकराल बना दिया। इस तरह की विषम जीवनशैली एवं आहार शरीर की धातुओं को धीमे धीमें दुर्बल कर देती है। वर्तमान में इसका प्रतिफल ये हुआ की आजकल छोटे छोटे बच्चे की जिनकी मूँछे भी नही आयी उनके भी बाल सफ़ेद होना शुरू हो गये है और महाविद्यालयीन जीवन में तो इनके पूरे बाल सफ़ेद हो जाते है या झड़ जाते है। अब ऐसे टकले युवक का व्यक्तित्व तो बिना बालों के प्रभावहीन हो जाता हैं। अतः ऐसे चमत्काररूपी उपचारों की खोज शुरू कि जाती है, जो रातोंरात सिर पे बाल ऊगा दे। इसीलिये युवा वर्ग चमत्कार की आस में आयुर्वेद की शरण लेता है, पर उनके हाथों घोर निराशा ही आती है। क्यू की बालों की ऐसी समस्याये maintenance प्रोब्लेम्स में आती है, जिनका तुरंत निराकरण नही किया जा सकता। प्यास लगने पर जैसे कुँआ खोदने से प्यास नही बुझती बस वैसे ही बालों की समस्याये कोई भी तेल सुबह लगाने से शाम तक मिट नही जाती। इसके उपचारार्थ जीवनशैली अर्थात आहारविहार में उचित बदलाव के साथ केशवर्धिनी रसायनम जैसी केशपोषक (बालों के पोषण में उपयोगी) औषधियों का दीर्घकाल एवं धीरजपूर्वक सेवन करना अत्यावश्यक होता है। बालों की स्वच्छता के लिए उष्ण एवम रुक्ष गुणात्मक शैम्पू का उपयोग करने की बजाए स्वामीआयुर्वेद केशिकाई (केशप्रक्षालक योग) जैसे प्राकृतिक योगों का उपयोग करना चाहिए। स्वामीआयुर्वेद केशिकाई प्रकृति विघातक रसायनों से मुक्त है। इसीलिए अपने सौम्य गुणों से बालों को स्वच्छ कर उनकी कोमलता तथा मुलायमता को बनाए रखता है। बालों का पोषण करता है।

बालों की कोई भी समस्या की चिकित्सा में सातत्य होना अत्यावश्यक है। यह सातत्य भी दीर्घकाल होना अपेक्षित होता है। क्यों की बालों की उत्पत्ति, स्थिति और पोषण यह सब शरीर के अस्थिधातु की स्थिती पर निर्भर करती है। आभ्यंतरतः सेवन की हुई कोई भी औषधि अस्थिधातु तक पहुँचने में समय लगता है इसीलिए केशचिकित्सा के परिणाम रातोरात नही मिलते। एक लंबे समय तक चिकित्सा सेवन परम आवश्यक है। दीर्घकाल इस शब्द की परिधी 6 महीने से लेकर 2 वर्ष तक है अर्थात किसी व्यक्ति को 6 महीने में उत्तम परिणाम मिलेंगे तो किसी को एक, डेढ़ या पुरे दो वर्ष भी लगेंगे पर उत्तम परिणाम मिलेंगे ही, ये अटल सत्य है। फिर भी शीघ्र परिणामों के लिये केशवर्धिनी रसायनम का उचित पंचकर्म एवम् सहयोगी औषधियों के साथ समायोजन किया जा सकता है। केशचिकित्सा में एक और बात उल्लेखनीय है और वो है - पथ्यापथ्य पालन अर्थात निषिद्ध आहारविहार का त्याग। चिकित्सा सेवन काल मे अगर परहेज का पालन नही किया जाता तो केशचिकित्सा पूर्णतः व्यर्थ है। इसीलिए खट्टा और तला हुआ खाना, बाँसी खाना, जंक फूड खाना, ज्यादा मात्रा में नमक का सेवन करना, फ्रिज का पानी पीना, अंकुरित धान्य का सेवन करना, दूध और नमकीन पदार्थों का साथ मे सेवन करना, रात में दही खाना, दोपहर में सोना रात्रीजागरण करना, शैम्पू का रोज रोज उपयोग करना ऐसे कारणों से दूर रहना ही बालों के स्वास्थ्य के लिए श्रेयस्कर होता है। इसीलिए बालों की चिकित्सा में औषधि सेवन के साथ साथ परहेज रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है अन्यथा उचित परिणाम पाने से आप निःसंदेह दूर ही रहोगे। अस्तु। शुभम भवतु।

© श्री स्वामी समर्थ आयुर्वेद सेवा प्रतिष्ठान, खामगांव 444303, महाराष्ट्र, भारत

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