स्वामीआयुर्वेद स्वास्थ्यसूत्रमाला - 39

दिनचर्या भाग 5 - अभ्यंग

अभ्यंग

Oil Massage

अभ्यंग यह दिनचर्या का पाँचवा सोपान है। गण्डूष के बाद अभ्यंग किया जाता है। अभ्यंग अर्थात सम्पूर्ण शरीर या शरीर के किसी एक भाग की तैल से मालिश करना। दिनचर्या का यही एक अंग ऐसा है, जिसे लोग अच्छी तरह से जानते है और समझते है। अभ्यंग को आजकल 'मसाज' के नाम से जानते है। जगह जगह मसाज पार्लर खुले है। परंतु आयुर्वेद शास्त्र को अभिप्रेत अभ्यंग और मसाज पार्लर मे किया जानेवाला मसाज इनमे बहोत फर्क है। आजकल मसाज यह शरीर को शिथिल (relax) करने के उद्देश्य से किया जाता है तथा मसाज करवाना यह एक सामाजिक प्रतिष्ठा का निदर्शक (Status symbol) माना जाता है। अभ्यंग सुबह सुबह प्रातः कर्मो से निवृत्त होने के बाद नहाने से पहले किया जाता है। अभ्यंग के लिए तरह तरह के तैलों का प्रदेश भिन्नता नुसार उपयोग किया जाता है। सामान्यतः सरसों के तैल का उपयोग अभ्यंग के लिए सर्वत्र किया जाता है। इसके सिवा व्याधिग्रस्त रुग्ण वैद्यराज की सलाहनुसार निर्देशित तैल का उपयोग भी मालिश के लिए कर सकते है। अभ्यंग के लिये, लिया जाने वाला तैल सुखोष्ण करके ही उपयोग मे लेना चाहिए। ठण्डे तैल का सहसा अभ्यंग के लिए उपयोग नही करना चाहिए। अभ्यंग करते करते यदि तैल ठण्डा हो जाये, तो उसे फिर से निवाया गरम (सुखोष्ण, Lukewarm) कर ही लेना चाहिए, पर ठण्डे तैल से अभ्यंग नही करना चाहिए। अभ्यंग करते वक्त हल्का जोर देकर ही मालिश करनी चाहिए। अगर मालिश करने के लिए कोई प्रशिक्षित व्यक्ती (masseur) है तो बढिया, नही तो खुद ही खुद के हाथो से मालिश करनी चाहिए।
अभ्यंग करने के लिए तैल एक स्टेनलेस स्टील की कटोरी मे लेकर उसे परोक्ष रूप से गरम करके, उस से मालिश करना चाहिए। मालिश शरीर के प्रत्येक भाग पर कम से कम 5 मिनीट तो करनी ही चाहिए। इसके हिसाब से देखा जाये तो सम्पूर्ण शरीर पर मालिश करने के लिए कम से कम 1 घण्टा लगेगा ही। मालिश करने के 1 घण्टे बाद गरम पानी से ही नहाना श्रेयस्कर होता है। इस पूर्ण प्रक्रिया मे १ घंटा आराम से निकल जाता है। जिन्हे समय की कोई कमी नही, उन्हे मालिश रोज करनी चाहिए, पर जिन के लिये यह कार्य दैनिक तौर पर करना संभव नही, ऐसे लोगो को मालिश कम से कम सप्ताह मे तो एक बार जरूर करना चाहिए। मालिश के बाद शरीर तैलीय हो जाता है, जिस से पूरा दिन काम करने मे थोडी असहजता महसूस होती है। इसलिए मालिश के बाद स्नान करते वक्त चने का आटा या फिर कोई अंगराग पावडर मलना चाहिए, जिससे शरीर पर रही अतिरिक्त चिकनाहट कम हो जाती है शरीर स्वच्छ हो जाता है और फुर्तीलापन महसूस होता है। मालिश प्रतिदिन करने के अनेक फायदे है और आयुर्वेद नित्य अभ्यंग करने की ही सलाह देता है। दैनिक कार्यों से शारीरिक ऊर्जा का क्षय होता है। नित्य अभ्यंग इस क्षय की आपूर्ति करता है तथा दैनिक कार्यक्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि कराता है। जो लोग बार बार थकान की तक्रार करते है उन्हें तो सैंकड़ो टॉनिक्स पीने की बजाये रोज मालिश करनी चाहिए। कुछ ही महीनों में उनकी यह तक्रार इतिहास बन के रह जाएगी इसमें कोई शक ही नहीं।

नित्य अभ्यंग के लिए आजकल ज्यादातर सरसों का तैल उपयोग में लाया जाता है। परन्तु सरसों का तैल यह तीक्ष्ण होता है इसलिए शीतकाल या शीत प्रदेशो में ही इसका उपयोग करना चाहिए। सिवाय सरसों के तैल का एक विशिष्ट प्रकार का असहज गंध भी आता है इसलिए रोज मालिश करने के लिए सरसों का तैल उतना उपयुक्त नहीं है। शेष तैलों में तिल तैल और नारियल का तैल अच्छा होता है। परन्तु तिल तैल का भी गंध इतना अच्छा नहीं रहता इसलिए नारियल के तैल का ही रोज की मालिश के लिए उपयोग करना चाहिए।

आजकल युवतियाँ और महिलाये त्वचा को नर्म, मुलायम बनाये रखने के लिए पेट्रोलियम जेली का उपयोग करते है। पेट्रोलियम जेली भले स्पर्श में स्निग्ध हो परन्तु यह पेट्रोल की ही एक आनुषंगिक उपज (by product) होने के कारण त्वचा का पोषण करने की बजाये उसमे विघटनात्मक प्रक्रियाओंको बढ़ावा देती है। इसलिए आजकल की महिलाओ की त्वचा में समय से पहले ही झुर्रियाँ (Premature wrinkles) उत्पन्न होना शुरू हो जाती है और तरह तरह ही एलर्जीयाँ उत्पन्न होती दिखाई देती है। त्वचा इतनी संवेदनशील हो जाती है की सादा सूर्यप्रकाश भी सहन नही होता। तुरंत खुजली शुरू हो जाती है और स्थानीय त्वचा लाल (Photosensitive dermatitis) हो जाती है। कभी कभी तो कोड जैसे सफ़ेद दाग (Polymorphic light eruptions) भी सिर्फ सूर्यप्रकाश के प्रतिक्रिया स्वरुप उत्पन्न हो जाते है। अन्य कई बार तो इन छोटी छोटी विकृतियों का एक्जिमा (Eczema) जैसे व्याधियों में परिवर्तन भी होता देखा जाता है।

छोटे बच्चों के मालिश के तैल के बारे में भी ऐसा ही कुछ प्रकार है, जिसमे प्राकृतिक तेल की जगह मिनरल आयल का उपयोग किया हुआ होता है। इस मिनरल आयल के उपयोग का परिणाम ये होता है की बच्चों की कोमल त्वचा को उचित पोषण नहीं मिलता परिणामतः बच्चों की त्वचा भी बहोत संवेदनशील हो जाती है। इसलिए आजकल के बच्चों को सिर्फ मच्छर काटने के बाद भी त्वचा में ऐसी प्रतिक्रियाये होती है की मानो बच्चे को कोई बड़ा त्वचारोग हुआ हो।

तिल/नारियल तैल से रोज मालिश करने से त्वचा नर्म, मुलायम तथा व्याधिप्रतिकारक्षम बनती है। शरीर का वर्ण निखरता है और त्वचा पर असमय झुर्रियाँ उत्पन्न नहीं होती। त्वचा की रोगप्रतिकारक शक्ती बढती है। ज्यादा गर्मी या ठंडी का त्वचा पर कोई विपरीत परिणाम नही होता।

अनेक प्रकार के संधीविकार, त्वचाविकार और हृदय के रोगों से मालिश करने से बचा जा सकता है।

ऋतुसंधी काल (दो ऋतूओंके बीच का समय) मे कई लोगो को खुजली शुरू हो जाती है, त्वचा रुक्ष होती है। हाथ पैरो के तलुओंकी ऊपरी परत निकलना शुरू हो जाती है। मालिश से इस अवस्था का भी निराकरण होता है। जो सज्जन मार्केटिंग मे है, जिन्हें बहोत मेहनत का काम करना होता है ऐसे लोगो को बिना भूले रोज मालिश करनी ही चाहिए। क्योंकि मालिश से शरीर के स्नायु मजबूत होते है और उनकी कार्यक्षमता कई गुना बढ जाती है। परन्तु ये सभी लाभ मालिश प्रतिदिन करने से ही मिलते है। महीने मे एक दिन करने से नही। फिर भी, कुछ नही से कुछ तो सही, इस सिद्धान्त के अनुसार जिस दिन समय मिले उस दिन अभ्यंग करना चाहिए। एक घंटा न सही परन्तु १५-२० मिनिट तो करना ही चाहिए। अस्तु। शुभम भवतु।

© श्री स्वामी समर्थ आयुर्वेद सेवा प्रतिष्ठान, खामगाव ४४४३०३, महाराष्ट्र, भारत

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