स्वामीआयुर्वेद स्वस्थामृतम -1

सद्योविरेचनम

सद्योविरेचनम अर्थात मृदु संशोधन। यह शरीर शोधन (Body Purification) की एक प्रक्रिया है। यह मुख्य पंचकर्मों मे से नही परंतु इसे उप पंचकर्म (Para Panchakarma Procedure) जरूर कहा जा सकता है। व्यस्त कार्यशैली के कारण आजकल सबको शास्रोक्त पद्धती से विरेचन करना संभव नही होता। ऐसी स्थिती मे सद्योविरेचनम प्रक्रिया को अवश्य अपनाया जा सकता है।
सद्योविरेचनम रविवार या अन्य छुट्टी के दिन अर्थात जब आप पूर्ण समय कार्यमुक्त (free) हो तभी करना चाहिये। यह प्रक्रिया जब भी करनी हो, उसके पहले दिन शाम को या तो भोजन नही करना चाहिये या तो शाम को 7 बजे के पहले हलका आहार ले लेना चाहिये। फिर उसी रात 4 बजे सिद्ध एरण्ड तैल पीना होता है। उसके लिए 1 कप गरम पानी/गरम दूध/त्रिफला क्वाथ (वैद्यराज की सलाहनुसार कोई अन्य प्रवाही द्रव्य भी लिया जा सकता है) चिनी मिट्टी के बर्तन (Mug) मे लेके उसमे शरीर के वजन के हिसाब से सिद्ध एरण्ड तैल मिश्रीत करना चाहिए। गरम पानी/गरम दूध के साथ सिद्ध एरण्ड तैल मिश्रीत करने से एरण्ड तैल अपने आप गरम होता है और उसे अलग से गरम करने की जरुरत नही पडती। पश्चात यह मिश्रण जब पीने जैसा कुनकुना गरम हो जाये तब एक-दो घूँट मे ही पी लेना चाहिए। पीने के लिए चीनी मिट्टी की तश्तरी का उपयोग किया जा सकता है। पीते वक्त सिद्ध एरण्ड तैल की खराब गंध आये तो एक हाथ से नाक बंद करके एक-दो बडे घूँट मे ही पी लेना चाहिए। इसके तुरंत बाद नैपकिन से मुँह पोछकर सौंफ/शक्कर/लौंग या इलायची खाई जा सकती है। इसके बाद डकार आये तब तक घर मे ही चक्कर लगाने चाहिए। डकार आने के बाद गरम कम्बल ओढ़के बायीं करवट पर सो जाना चाहिए और संभव हो तो, पंखा भी नही चलना चाहिए। ए.सी. तो दूर की बात है।

सिद्ध एरण्ड तैल पीने के 1-1½ घण्टे बाद बहोत लोगों को पेडू (lower abdomen or pelvis) मे सख्त दर्द हो सकता है, पर इसमे डरने की कोई जरुरत नही है। एक दो बार शौच होने के बाद यह दर्द अपने आप मिट जायेगा। कई लोगों को ऐसा दर्द होता भी नही है।

सिद्ध एरण्ड तैल पीने के 2-2½ - 3 घण्टे बाद जुलाब शुरू हो जाते है और शुरू होने के बाद 3-3½ घण्टे तक चालू रहते है। इस दरम्यान अगर पानी पीना है, तो गरम पानी ही पीना चाहिये। गरम करके ठण्डा किया हुआ नही चलेगा। जुलाब शुरू होने के बाद बंद होने तक कुछ भी नही खाना चाहिये, भले कितनी ही ज्यादा भूख क्यूँ न लगे। प्यास लगे तो गरम पानी पीना चाहिये। जुलाब बंद होने के बाद ही गरम पानी से नहाना चाहिए। स्नान के बाद ताजा बनाया हुआ गरमागरम ढीला भात + मुंग की सादी पतली दाल खानी चाहिए। जुलाब बंद होने के बाद अगले 24 घण्टे तक उपरोक्त दाल+भात ही खाना चाहिए। दाल+भात भरपेट खाया जा सकता है। 24 घण्टे बाद सामान्य आहार शुरू किया जा सकता है। सद्योविरेचनम के दिन कोई भी औषधी नही लेनी चाहिए। फिर चाहे हृदयरोग की दवा हो, बीपी की हो या मधुमेह की। अगर कोई औषधी चालू करना हो तो सद्योविरेचनम पूरा होने के 24 घण्टे के बाद ही शुरू करे।
व्याधी की तीव्रता, रोगी का बल, प्रकृति एवं वर्तमान ऋतु के अनुसार सद्योविरेचनम की वारंवारता एवं सिद्ध एरण्ड तैल की मात्रा (Dose) निश्चित करना चाहिये। सद्योविरेचनम की प्रक्रिया हर 7/15/30/60 दिन मे एक बार आवश्यकतानुसार दोहराई जा सकती है।

विशेष निर्देश :

1) उपरोक्त वर्णन मे जो समय निर्देश किया गया है, वह एक साधारण निर्देश है। काल एवं व्यक्ति परत्त्वे इसमे बदलाव हो सकते है। यह ध्यान रखे।

2) सद्योविरेचनम में किसी व्यक्ति को 5 बार तो किसी को 10-15 बार शौच हो सकते है। व्यक्ति के कोठे (कोष्ठ) की प्रकृति पर शौच वेग संख्या निर्भर करती है।

3) जुलाब होने के बाद गर्मी के दिन हो तो भी नहाने के लिए गरम पानी ही लेना चाहिए। ऋतु के अनुसार पानी की गरमाई मे कम ज्यादा फर्क किया जा सकता है।

4) सद्योविरेचनम के दिन पूर्ण दिन विश्राम आवश्यक है।

5) महिलाओं को मासिक धर्म के 4 दिनों में या अन्य किसी कारणवश मासिक धर्म चालू हो तो उस समय के दरम्यान इसे नही करना चाहिए। गर्भिणी माताओं में भी इसका निषेध है।

6) सद्योविरेचनम के दिन तथा उसके पश्चात 5 दिन तक मैथुन वर्जित करना चाहिए।

7) सद्योविरेचनम के दिन हो सके तो चाय वर्ज्य करना चाहिए।

8) मुंग की सादी पतली दाल - इसे मराठी मे 'वरण' भी कहते है। 'वरण' शब्द से यहाँ निश्चित रुप से क्या अपेक्षित है इसका अंदाजा आपको आ जायेगा। इसे बनाने की विधी (receipe) आपको किसी वेबसाइट से मिल जायेगी।

9) 30 किलो के नीचे जिनका वजन है, वो आयुर्वेदिक डॉक्टर की देखभाल मे ही यह प्रयोग करे।

10) हलका आहार जैसे दाल-भात (खिचड़ी नही) सिर्फ उपमा, जुवार की रोटी और दाल, भगर (Barnyard millet) का सेवन करना चाहिए।

11) सिद्ध एरंड तैलम की मात्रा - वजन अगर 60 या 60 से कम होगा तो शरीर का वजन × 0.5 ml इस फॉर्मूले का उपयोग करे और वजन अगर 60 किलो से ज्यादा है शरीर का वजन × 0.6 ml इस फॉर्मूले का उपयोग करके सिद्ध एरंड तैलम की मात्रा का विनिश्चय किया जा सकता है। वजन उचित होने के बाद भी अगर किसी कारणवश किसी व्यक्ति को दुर्बलता (weakness) ज्यादा है तो ऐसे व्यक्ति को आयुर्वेदिक डॉक्टर के देखरेख में ही यह प्रयोग करना चाहिए।

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